जाग देवी दिव्य रूप, अपना दिखा दे तू

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जाग देवी दिव्य रूप, अपना दिखा दे तू

जाग देवी दिव्य रूप,
अपना दिखा दे तू
नैय्या मंझधार में है,
पार यह लगा दे तू।।

देश की सुहानी तस्वीर
तेरे हाथ है बिगड़ी बनानी
तकदीर तेरे हाथ है।
समय है सुहाना मत
इसको गंवा दे तू ।।

देश के सौभाग्य की,
हे बहन तू निशानी है
सीता तू ही दुर्गा है
झांसी वाली रानी है।
आज इतिहास फिर
अपना दोहरा दे तू ।।

पतित पावनी गंध चारों
ओर बिखराती चल
बेटी-बहन-माता वाला
नाता तू निभाती चल।
तुझे जो गिराना चाहे
धूल में मिला दे तू ।।

जिस दिन सुमार्ग पे
पग तू बढ़ायेगी देश में
सुख-शान्ति-समृद्धि मुस्करायेगी।
अपना असली रूप
संसार को दिखा दे तू ।।