प्राणों से हे प्यारे भगवन्

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अथ मार्जन मन्त्राः

ओं भूः पुनातु शिरसि।
ओं भुवः पुनातु नेत्रयोः ।
ओं स्वः पुनातु कण्ठे।
ओं महः पुनातु हृदये।
औंः जनः पुनातु नाभ्याम् ।
ओं तपः पुनातु पादयोः ।
ओं सत्यं पुनातु पुनः शिरसि ।
ओं खं ब्रह्म पुनातु सर्वत्र ।। ३।।

प्राणों से हे प्यारे भगवन्,
सिर को करो पवित्र निशदिन।
दुःख-विनाशक दीनदयाला,
आँखों में रहे ज्ञान उजाला।।

सर्व-व्यापक सुख के दाता,
करो पवित्र कण्ठ विधाता।
महा प्रभु तुम ईश हमारे,
हृदय करो पवित्र हमारे।।

करो पालना जगत बनाकर,
नाभि मेरी करो पवित्र।
दण्ड-दाता प्रभु ज्ञान भण्डारा,
रहे पवित्र मार्ग हमारा।।

सत्य स्वरूप अविनाशी ईश्वर,
पुनः पवित्र करो मेरा शिर।
महाप्रभु सर्वत्र व्यापक,
करो पवित्र बुद्धि आदिक ।।