बलो बलं वेत्ति न वेत्ति निर्बल
१. बलो बलं वेत्ति न वेत्ति निर्बल
हीरे की परख जौहरी जाने।
२. यथा वृक्षास्तथा फलम्
जैसी करनी वैसी भरनी।
३. इतो नष्टस्ततो नष्ट धोबी का
कुत्ता न घर का न घाट का।
४. यत्र नास्ति दुमो तत्र एरण्डोऽपिदुमायते
अंधों में काना राजा।










