अरे किसने चिता में ये,मेरी बेटी जला दी है।
तर्ज – मुझे तेरी मोहब्बत का…..
श्मशान भूमि में जिन्दा जली बेटी की लाश को देखकर पिताजी तड़फते हुए कहते हैं-
अरे किसने चिता में ये,
मेरी बेटी जला दी है।
ख़ता थी क्या भला इसकी,
जो इसको ये सज़ा दी है।
पिता का प्यार होता क्या,
अरे कोई तो ये जानों
मेरा दिल आज रोता है-2,
कोई इस दिल को पहचानों
आज जग से सचिन ‘सारंग’,
मेरी बेटी मिटा दी है अरे किसने………
अभी दो-तीन दिन पहले,
मुझे आयी थी ये कहकर मैं
जब आऊँगी दोबारा 2,
तो घर जाऊँगी मैं रहकर
मगर वादे से पहले ही,
अगन किसने लगा दी है
अरे किसने……….
खबर थी ना मुझे कोई,
तेरी किस्मत ये फूटेगी
चिता के बीच में जलकर-2,
लड़ी श्वासों की टूटेगी
लगाकर आग को तन में,
अरे किसने हवा दी है अरे किसने,
तेरी माता क्या सोचेगी,
ख़बर ये मौत की सुनकर
तेरी यादों में खोकर के-2,
रोयेगी वो धुन-धुन कर
आज तूनें मेरी बेटी,
वो माता भी भुला दी है
अरे किसने………










