बचपन सम्भालना बचपन संवारना दिन जिन्दगी
बचपन सम्भालना बचपन
संवारना दिन जिन्दगी
के सारे हंस के गुज़ारना
कलियों में ही छुपी है
फूलों की मुस्कराटे,
इनको सम्भाले रखना
होते है अन्धे काँटे,
निर्मल से जल की
उनको देना फुहारना ।।१।।
सच्ची डगर यही है
दुरितों से दूर रहना,
गम खाना मौन रहना
संकट को सहन करना,
संयम की इस दवा से
आये विकार ना ।। २।।
स्वस्ति के बीज तेरे
मन चाहा दान देगें,
आयु बल प्राण देगें
प्रज्ञा सम्भान देगें,
भद्रता का ही सुरेन्द्र
आंचल पसारना।। ३।।










