जहां डाल-डाल पर सोने की चिड़ियाँ करती थी बसेरा।
जहां डाल-डाल पर सोने
की चिड़ियाँ करती थी बसेरा।
कहां भारत देश है मेरा,
कहां भारत देश है मेरा।।
गौतम कपिल कणाद जैमिनि
से विद्वान जहाँ थे।
चकवे बैन युधिष्ठिर विकम से यजमान
नई रोशनी लेकर आता था
नित नया कहां भारत….. जहाँ थे सवेरा ।।
सोना चांदी हीरे मोती
घर-घर भरे पड़े थें।
चोरी का कहीं नाम नहीं था
ना झूठे झगड़े थे।।
जाति-पाति ऊंच नीच का ना था
कही बखेरा।। कहाँ भारत….
जहां दूध दही धृत अन्न
फल सब्जी रस पीते खाते थे,
आहार व्यवहार आचार
विचार में सत्यता अपनाते थे,
झूठ कपट छल दम्म
देश का कहीं न ही था।
कहां भारत………. ।।3।।
जहां राजा प्रजा स्वप्न में
भी मन मानी नही करें थे
अनुशासन में बन्धे धर्म
ईश्वर से बहुत डरे थें,
शोभाराम प्रेमी जिसका
कुल विश्व कभी था चेरा ।।
कहां भारत देश……….










