ललना और लला चाहते हो

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ललना और लला चाहते हो (धुन-ओ मेरी महबूबा)

ललना और लला चाहते हो
यदि भला, यह है जीने की कला
इसे नियम के साथ चला।
डगर में नजर जहां चुक जायेगी,
वही पर गाड़ी तेरे जीवन
की रुक जायेगी।। टेक ।।

शौचादि से निवृत होकर
नित्य व्यायाम कर,
इन्द्रियों के घोड़ो की
लगाम थाम कर।
नियमबद्ध होकर के
दिनचर्या जब चलेगी,
जिन्दगी की बेल नित्य
फूले और फलेगी।
चूका मौका, होगा धोखा,
विषियों में वृत्ति जहां
झुक जायेगी।
वहीं पर गाड़ी तेरे
जीवन की यह रुक जायेगी।।1।।

कानों से जो सुना है
उस पर विचार कर,
असत्य को छोड़ सत्य
दिल में धार कर।
सर्वोत्तम बताया स्वप्न
में भी बुरा कभी पहले
जानों महर्षियों ने तरीका,
चाहो ना कसी का,
और फिर मानो,
यह सिद्धान्त श्रृंखला
जहां लुक जायेगी।
वही पर गाडी तेरे जीवन
की यह रुक जायेगी।।2।।

साधन सम्पन्न ईश्वर ने
तुम्हें किया है,
कर्म करने को यह
कर्म क्षेत्र दिया हैं,
तत्परता से कर्तव्यों का
पालन किये जा।

यही तो है जीवन प्रेमी
संचालन किये जा,
ड्यूटी बजा, ले-ले मजा।

यह स्पीड बैट्री जहां फुंक जायेगी,
वहीं परा गाड़ी तेरे जीवन की रुक जायेगी।।3।

कवित्त

दीप से जलना न सीखो दीप से मुस्कान सीखो
सूर्य से ढलना न सीखो सूर्य से उत्थान सीखो
देखना है आज हम इस चित्र में अंकित कहां है
राह चलना ही न सीखो राह का निर्माण सीखो