कहने वाले कह जाते हैं

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कहने वाले कह जाते हैं (धुन- लिखने वाले ने लिख डारे)

कहने वाले कह जाते हैं
सुनकर सुनने वाले,
सार्थक तब ही है जीवन
में जो ढाले ।।
जटा जूट अलफी गल
माला मूंड मुडाया कम्बल काला।।

स्वर्ग मे क्या कुछ होने वाला,
भाषण में विवरण दे डाला।।
कथनी करनी में अन्तर है
तन उजले मन काले
सार्थक तब ही है
जीवन में जो ढाले ।।1।।

कलुषित है जीवन ईर्ष्या
द्वेष कलह अटपट से, झंझट से ।।
दोष न छूटे हृदय क्या फायदा
इस तोता पट से, रट से ।।

चिन्तन के बिन, धार्मिक
निश दिन अनगिन ग्रंथ पढ़ डाले
सार्थक तब ही है जीवन
में जो डाले।।2।।

पहले सुनो, सुन करके विचारो,
विवेक तर्क युक्ति से निखारो ।।
फिर उसको जीवन में धारो,
गुण ग्राही बन मन को संवारो ।।

श्रवण मनन और निद्ध्यासन के,
नियमों को अपनाले ।।
सार्थक तब ही है जीवन
में जो ढाले । ।3।।

प्रेमी निज कर्तव्य को जानो,
जग के हर अवयव को ऋषियों
के अनुभव को प्राण प्रिय
प्रणव को जानो, जानो, जानों ।।

स्वयं ही जो नहीं सम्भल सके वह,
क्या औरो को सम्भाले ।
सार्थक तब ही है जीवन
में जो ढ़ाले । ।4।।