राजनीति मत पन्थ मजहब की झपटों में

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राजनीति मत पन्थ मजहब की झपटों में

राजनीति मत पन्थ
मजहब की झपटों में,
धधक रहा है राष्ट्र आग
की लपटों में। टेक।
मानव मानवता की
होली फूंक कर,
मना रहा है फाग
द्वेष छल कपटों में।।1।।

सृष्टि का इतिहास
बदलता जा रहा,
बाघ भया भयभीत
भेड़ की डपटों मे।।2।।

माली हरियाली की
डाली नोचकर,
मग्न जशन् रंगरैली
सैरों सपटों में। ।3।।

प्रेमी भैया आज
देश की नैया को,
कौन सम्भाले फंसी
भंवर की चपटों में।।4।

प्रेमी छन्द

संगच्छध्वम् का करें
गला फाड़ जयघोष
पटकी देने को छिपा
है मन में आंक्रोष