कुछ पल का है जीना

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कुछ पल का है जीना

कुछ पल का है जीना,
बस सीखा खाना पीना।
कुछ और भी तू कर ले,
कि पाए ब्रह्म धाम ।। टेक ॥

पाया ज्ञान वेद से हमने,
ऋत को भूल न जाना।
सत्य का साक्षात तू कर ले,
ब्रह्म निकट हो जाना ।।१॥

सबसे ऊंची है अनुभूति,
अनन्त शक्तिमय ब्रह्म की।
भीतर बाहर वह ही एक है,
इत उत तित सम सम ही ।। २॥