प्रभाती सूरज का रंग कितना पलाश है।

0
26

प्रभाती सूरज का रंग कितना पलाश है।

प्रभाती सूरज का रंग
कितना पलाश है।
हर उगन कितनी-
कितनी पाश है ।। १ ।।

ब्रह्म से जुड़कर के
तू देख जरा।
जिन्दगी पलाश ही
पलाश है।। २ ।।

सारी दीवारें जरा तू तोड़।
तू खुद खुला आकाश है ।। ३ ।।

समय से ते ऽ ज गति के सवार।
सिद्ध को अवकाश ही अवकाश है ।।४।।

वैद हो जाए ऽ ऽ ऽ तेरा जीवन प्राण।
जिन्दगी क्या तू भी ब्रह्म तराश है ।। ५ ।।

खुद के स्वर खुद को ले बुला।
हर श्वास तेरी होली फाग है।। ६ ।।