नारी जो बने, सुत ऐसे जने ।
पितरों की आज्ञा मान रे ऽ
धर्म निभाने वाले हों।
कोई राम बने, कोई श्याम बने ।
कोई भरत लखन हनुमान रे ऽ
यश फैलानेवाले हों ।। टेक ।।
मिले विश्व में दूर दूर
तक वैदिक शिष्टाचार ।
खान-पान पहराव में होवें
उत्तम पुनीत आचार ।
सब वेद पढ़ें, सुविचार बढ़ें।
वेदामृत कर नित पान रे ऽ
आर्य कहलानेवाले हों ।। १ ।।
सर्वगुणों का केन्द्र बनाकर
भारत को इक बार।
पहले जैसा देश वनादे
दुनियाँ को आधार ।
सर्व दुःख हरे, आरोग्य करे।
कर वेदनिधि से दान रे ऽ
ज्ञान बढ़ानेवाले हों ।। २ ।।
स्वप्न सत्य कर राम राज्य
का दे सबको दिखलाए।
और नहीं तो अश्वपति
का काल दिखाए ला।
रसधार बहे, आनन्द रहे।
फिर प्यारा देश महान रे
ऽ कर दिखलानेवाले हों ।। ३।










