मुक्ति का मन्त्र दो,आत्मा स्वतन्त्र हो।

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मुक्ति का मन्त्र दो,आत्मा स्वतन्त्र हो।

मुक्ति का मन्त्र दो,
आत्मा स्वतन्त्र हो।
सत्य बोलने से हम रुके
नहीं 5 साथी हम न्याय के,
आगे अन्याय के।
आर्य बालकों के
सर झुके नहीं ।। टेक ।।


तुम सबके पालक,
हम तेरे बालक।
भूलें हमारी सुधार दो।
गंगा सा निर्मल दो,
जीवन हमें अब ।


हिमालय से ऊँचे विचार दो।
पथ जो उजाड़ हों,
ऊँचे पहाड़ हो।
हिम्मत के पग ये रुके नहीं ।। १ ।।

हे प्राणदाता,
जग के विधाता।
धरती के धीरज
का धर्म दो।


जन जन में जीवन,
जागृत करें ऐसा योगी
पावन का कर्म दो।
मन में विश्वास हो,
पल की ना आस हो।
ज्योति ये स्वधर्म की बुझे नहीं ।। २ ।।