बलिदानों से हमको मिला देश हमारा।

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बलिदानों से हमको मिला देश हमारा।

बलिदानों से हमको
मिला देश हमारा।
इस वास्ते यह देश हमें
प्राणों से प्यारा ।। टेक ।।


इस देश के लिए राणा ने
महलों को तजा था।
शिवाजी जंगलों में युद्ध
करता फिरा था ।।


इस देश के लिए लड़ी
थी झांसी की वो रानी।
हँस हँस के दीवारों में
चिने कहतें गुरवाणी ।।
भारत का दुनियाँ भर में
है इतिहास निराला ।। १ ।।

इस देश के लिए लाखों
ही घरबार लुटे थे।
इस देश के लिए बच्चों
से माँ बाप छूटे थे ।।


इस देश के लिए बेवा
हुई हजारों बहनें ।
इस देश के लिए छोड़
दिए पहनने गहनें।
मिला था भारत देश को
मुक्ति का किनारा ।। २ ।।

इस देश के लिए खून
शहीदों ने दिया था।
इस देश के लिए गांधी
ने सब त्याग किया था।।


इस देश के लिए नीन्द
दयानन्द ने तजी थी।
नेताजी पे पोशाक
सिपाही की सजी थी ।।
गूँजा था कोने कोने में
जयहिन्द का नारा ।। ३ ।।

दूर हुई थी तभी
वतन से गुलामी ।
अंग्रेजों ने दी राष्ट्र के
झण्डे को सलामी ।।


हिन्दु हो मुस्लिम सिक्ख
हो चाहे हो ईसाई।
बलिदान कर दो धर्म
जाति और नेताई ।।
अखण्डता और एकता
का एक दो नारा ।। ४ ।।