छोटे-छोटे पांव हैं

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छोटे-छोटे पांव हैं

छोटे-छोटे पांव हैं,
अपने आगे मंजिल बड़ी-बड़ी,
निकल पड़ो रे छांव से बाहर,
धूप बुलाती खड़ी खड़ी ।। टेक ।। छोटे….

जहां-जहां भी आंसू होंगे,
हम पहुंचेंगे वहीं-वहीं,
फूलोंपर जो शूल बिछे हों,
आगे बढ़ते रहें वहीं।
देख रही है हमको दुनिया – २
चौरस्तों पर खड़ी खड़ी ।।१।। छोटे…

जिस मिट्टी में जन्म लिया है,
उसका कर्ज चुकाएंगे,
हम गुलाब की कलियाँ हैं,
इस धरती को महकाएंगे।
जीवन आगे बढ़ जाता है-२
मौत सिसकती पड़ी-पड़ी ।।२।। छोटे….