हे प्रभु हम तुमसे वर पावे
हे प्रभु हम तुमसे वर पावे
सकल जगत् को आर्य बनावें ।।१।।
हे प्रभु……
फैले सुख सम्पति फैलावें,
आप बढ़े तब राज्य बढ़ावें ।।२।।
हे प्रभु……
वैर विघ्न को मार भगावें,
प्रीति रीति की नीति चलावें ।।३।।
हे प्रभु……
हे प्रभु हम तुमसे वर पावे
हे प्रभु हम तुमसे वर पावे
सकल जगत् को आर्य बनावें ।।१।।
हे प्रभु……
फैले सुख सम्पति फैलावें,
आप बढ़े तब राज्य बढ़ावें ।।२।।
हे प्रभु……
वैर विघ्न को मार भगावें,
प्रीति रीति की नीति चलावें ।।३।।
हे प्रभु……
आर्यों! इस देश की बिगड़ी बनाना है तुम्हें।
कुछ लेना न देना, मगन रहना।।
मन फूला फूला फिरै जगत में कैसा नाता रे
ओ३म् सुखकन्द से सच्चिदानन्द से याचना है।
चेतना है जग में तो चेतना जगाओ आप।
नील गगन के नीचे तुम सब मिलकर गाओ।
जो दुःखियों की सेवा में तन मन लगाए
खून व पानी साथ नहीं बह सकते हैं
हे जगदीश्वर !! तुम ‘पुरुषाक’ हो
नरतन है बड़ा अनमोल
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