जवानी गई स्वांग सिनेमें घरों में
जवानी गई स्वांग सिनेमें घरों में
अरे फैशन के झूठे आडम्बरों में।।
१ बच्चपन में जो कभी शेरों से खेले।
भरकर मस्ती में हाथी धकेले।
आज खो गये वो लता के स्वरों में….
२. गठीले बदन और चमकते वो चेहरे।
लूट लियेजा रहे हैं लूटेरे।
अनमोल जीवन सस्ते दरों में….
३. पश्चिमी सभ्यता में गई देश भक्ति।
तामसिक भोजन से गई आत्म शक्ति।
अरे जिन्दों में छोड़ा ना छोड़ा मरों में….
४. पदों और डिग्रीयों की इच्छा ने मारे।
स्वार्थ के सिन्धु में डूबे हैं सारे।
‘प्रेमी’ क्या रखा है अब लकचरों में….










