जीवन बीत रहा पल-पल में

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जीवन बीत रहा पल-पल में

जीवन बीत रहा पल-पल में-२
किसे पता है कौन जगह ना
आने वाली कल में….

१. महाकाल विकराल खड़ा है,
अपना फैन्दा डाल खड़ा है।
कोई बचा ना कोई बचेगा
मृत्यु की हलचल में

२. भरत कहाँ है राम कहाँ है,
धर्मराज धनश्याम कहाँ है।
है कोई उनका पता बताए
सारे भूमण्डल में

३. टिमटिम करते नभ में तारे
छुप जाएगें एक दिन सारे।
नहीं बिजुरियाँ चमकेगी
इस काले से बादल में……

४. मोह माया में भटक रहा है
इस उलझन में अटक रहा है।
बिता दिया ‘बेमोल’ ये जीवन
दुनियाँ की कल-कल में।