तन मन से रहें हम स्वस्थ स्वस्थ (तर्ज-तू चीज….)
तन मन से रहें हम स्वस्थ स्वस्थ,
तन मन से रहें हम स्वस्थ स्वस्थ ॥
छोड़ दिया क्यों घी दूध दही को।
पौष्टिक फल-फूल कन्द सभी को।
पीकर मदिरा और चाय चाय।
करता रहता है हाय-हाय।
नहीं मानें सच्ची राय-राय।
सब चाल-चलन है भ्रष्ट-भ्रष्ट….।
दौड़ें हम नित दिन कोश-कोश।
पत्थर से बनें तन ठोस-ठोस।
यही हो अपना घोष घोष
व्यायाम जरूरी सख्त-सख्त ।
प्रातः प्रातः हर शाम शाम।
नगरी नगरी व ग्राम-ग्राम।
चाहे छाया हो या घाम-घाम-
व्यायाम जरूरी वक्त-वक्त।
रखते थे क्यों दादा परदादा।
चिन्तन ऊँचा जीवन भी सादा।
जीते थे सौ-सौ साल-साल।
नहीं छू पाता था अकाल-काल ॥
पर क्या है अपना हाल-हाल।
नित रोग से तन है ग्रस्त-ग्रस्त।










