अब सौंप दिया इस जीवन का सब भार तुम्हारे हाथों में।
अब सौंप दिया इस जीवन का
सब भार तुम्हारे हाथों में।
है जीत तुम्हारे हाथों में,
है हार तुम्हारे हाथों में॥
दृग्-बिन्दु बह रहे हैं भगवन्,
और विरह-वियोग सताय रहा।
मुझ पूजक की इक रग-रग का
हो तार तुम्हारे हाथों में।
मेरा निश्चय है एक यही,
एक बार तुम्हें पा जाऊँ मैं।
अर्पण कर दूं जगती भर का,
सब प्यार तुम्हारे हाथों में।
या तो मैं जग से दूर रहूं,
और जग में रहूं तो ऐसे रहूं।
इस पार तुम्हारे हाथों में,
उस पार तुम्हारे हाथों में।
मुझ में तुझ में भेद यही,
मैं नर हूं तुम नारायण हो।
मैं हूं संसार के हाथों में,
संसार तुम्हारे हाथों में।










