यूं प्यारा लागै जी है
यूं प्यारा लागै जी है
सच्चा ओम् नाम-यूं प्यारा
लागै जी है सच्चा ओम् नाम।
नित्यानन्द तेरा नाम,
जपै है सुबह शाम जिसका है
कलोई गाम यूं प्यारा लागे।
रचा ये संसार, पावे ना जिसका
पार-सूरज चन्द्र तारे तमाम-
यूं प्यारा लागे।
जोड़कर पांच तत,
बनाया जगत पशु-पक्षी
ताम-ताम-यूं प्यारा लागे।
बनाए कैसे नेम, उके ना
कोई टेम-क्या अच्छा इन्तजाम
यूं प्यारा लागे।
पशु क्या इंसान,
है न्यारी पहचान हैं अलग
सबके चाम-यूं प्यारा लागे।
सर्दी व बरसात,
रचे दिन रात-कभी सुबह
कभी शाम यूं प्यारा लागे।
फूलों के कितने रंग,
होते ना कभी भंग-सहें
सर्दी वर्षा बाम यूं प्यारा लागे।
मनुष्य चोला,
क्या अनमोला जो है
मुक्ति का धाम यूं प्यारा लागे।










