चली छोड़ संसार बड़ी तेज रफ्तार
चली चली रे उम्र तेरी चली रे।
चली छोड़ संसार बड़ी तेज रफ्तार
दिन रात पे सवार होके चली रे ॥
1. ये ना सोचा दिन चार जवानी,
चार दिन में है खत्म कहानी। 1
जाए छोड़ घर बार, बेटा-बेटी और
नार-जब मौत सिरहाने तेरी खड़ी रे….।
2. बिन ओम् नाम कोई ना सहारा,
ऋषि-मुनियों ने यही है पुकारा।
ना तूं जंगलों में जा,
नहीं तुझसे जुदा,
आज बात मैं सुनाऊँ भली-भली रे….।
3. ये जगत् मुसाफिरखाना,
हुआ क्यूं तूं इसमें दिवाना।
होके ठगीया कमाए,
सब यहीं रह जाए फिर
आना न होगा इस गली रे….।
4. अपने मन को समझाले,
कुछ अपना आप बनाले।
कर प्रभु से प्यार, तेरा होगा
बेड़ा पार-क्यूं फिरता
आवारा गली-गली रे….।










