जागो रे ए दौलत के दीवानो।

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जागो रे ए दौलत के दीवानो।

जागो रे ए दौलत के दीवानो।
जागो रे ए दौलत के दीवानों ।।

दौलत लड़का दे सकती पर,
पुत्र दिलाना मुश्किल है।
दौलत नौकर दे सकती पर,
सेवक पाना मुश्किल है।।

दौलत औरत दे सकती पर,
पत्नी नहीं दिला सकती।
दौलत बिस्तर दे सकती पर,
नींद कभी न ला सकती ।।
जागो रे……..

ऐनक मिलती दौलत से,
पर नैन कहां से लाओगे।
रोटी मिलती दौलत से,
पर भूख कहां से पाओगे ।।
जागो रे……

दौलत से बादाम मिलेंगे,
पर ताकत न आयेगी।
सुख दिलाएगी ये दौलत,
पर शांति नहीं दिलायेगी ।।
जागो रे…….

कुछ पैसे में जाकर सज्जनों
जहर अभी ले आओगे।
बीस करोड़ में भी अमृत की
बूंद एक ना पाओगे ।।
जागो रे…….

दौलत गीता दे सकती है,
पर ज्ञान नहीं दे सकती है।
दौलत मंदिर दे सकती,
भगवान नहीं दे सकती ।।
जागो रे…..

धन से सुर्खी पाउडर ले लो,
सुन्दरता न पाओगे।
बाजा ले लो दौलत से पर,
कंठ कहां से लाओगे ।।
जागो रे…….

लाख सितारे चमके रवि
बिन दूर अंधेरा न होगा।
आत्मज्ञान के बिना
सुखों का कभी सवेरा न होगा।।
जागो रे…..

सस्कृत में धन को द्रव्य कहा जाता है अर्थात बहने वाला यदि वह स्थिर रहा तो रूके हुए पानी की तरह उसमे से बदबू आने लगती है।