नाम प्रभु का प्यारा

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प्यारा ओ३म् (तर्ज-रघुपति राघव राजाराम)

नाम प्रभु का प्यारा
ओम् प्यारा ओम् प्यारा ओम्।
दाता पालन हारा ओम् प्यारा
ओम् प्यारा ओम् ।

दूध में है घी सितार के
सुरों में राग है।
तेल है तिलों में जैसे
पत्थर में आग है।
कण-कण में विस्तारा
ओम् प्यारा ओम् प्यारा ओम्।

जो विराजमान है
आकाश में पाताल में।
एकसा भविष्य
वर्तमान भूत काल में।
अमृत रस की धारा
ओम् प्यारा ओम प्यारा ओम।

ओम् इष्टदेव पूजनीय
है जहान का।
और कहीं दूसरा न
कोई जिसकी शान का।
कुल दुनियां से न्यारा
ओम् प्यारा ओम् प्यारा ओम् ।

सूर्य और चांद जिसकी
आरती उतारते।
नेति नेति कहके जिसको
वेद भी पुकारते।
‘पथिक’ सबका सहारा
ओम् प्यारा ओम् प्यारा ओम् ।

व्यक्ति अपने अभाव से नहीं,
दूसरों के प्रभाव से दुःखी है।।