जो हरि गीत प्रीत संग गाये

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जो हरि गीत प्रीत संग गाये

जो हरि गीत प्रीत संग गाये,
तिसमें शोक निकट नहीं आये।

अमृतवत तेरो चरित मनोहर,
मन की तपक बुझाये ।।

परम सुखदाता ज्ञान प्रदाता,
तू है नाम धराये।
जो हरि गीत प्रीत संग गाये, जिसमें……..

विषय उपराम रहूँ मैं,
भक्ति हृदय में भाये।
जो हरि गीत प्रीत संग गाये, जिसमें……

हे प्रभु हम अति दुःखिया होकर,
तब शरणागत आये।
जो हरि गीत प्रीत संग गाये, जिसमें ……..

मांग रहें हैं द्वार पर याचक,
अब क्यों देर लगाये।
जो हरि गीत प्रीत संग गाये, जिसमें…….

पढ़ सुन वेदवेदांग अमीचन्द,
संशय भ्रम मिटाये।
जो हरि गीत प्रीत संग गाये, जिसमें…….

शोक निकट नहीं आये ।।
सुनु जननी सोइ सुतु बड़भागी।
जो पितु मातु वचन अनुरागी।।