यह गर्व भरा मस्तक मेरा

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यह गर्व भरा मस्तक मेरा

यह गर्व भरा मस्तक मेरा
प्रभु चरण धूलि तक झुकने दे।
अहंकार विकार भरे मन को,
निज नाम की माला जपने दे।।

मैं मन के मैल धो न सका,
यह जीवन तेरा हो न सका।
में प्रेमी हूँ इतना न सता,
गिर भी जो पढूँ तो उठने दे।।
यह………..

मैं ज्ञान की बातों में खोया,
और कर्महीन पड़कर सोया।
जब आँख खुली तब मन रोया,
जग सोये सबको जगने दे।।
यह………

जैसा हूँ मैं खोटा या खरा,
निर्दोष शरण में आ तो गया।
इक बार ये कह दे खाली जा,
या प्रीति की रीत छलकने दे।।
यह……….

जिन्होंने गर्व किया,
मिट गये उनके वंश,
तीनों कुल तुम जान लो रावण,
कौरव, कंस ।।