अगर दिल किसी का दुखायेंगे हम।
अगर दिल किसी का
दुखायेंगे हम।
तो खुशियां कहां से
मनायेंगे हम ॥ टेक ॥
कमाते रहे हम
अगर कर्म काले।
लगाते रहें हम
बबूल कांटे वाले ।
तो अमुवा कहां से
खायेंगे हम ॥1॥
बुरा अगर किसी का
हम ठान लेंगे।
पशु पक्षियों की आप
जान लेंगे।
तो अपनी भी गर्दन
कटायेंगे हम ॥2॥
नीयत हम पराये
धन पर धरेंगे।
भलाई के बदले
बुरा हम करेंगे।
तो अपनी गर्दन
झुकाएगे हम ॥3॥
अगर साज दिलका
सजाया ना हमने।
बीणा के तारों को
मिलाया ना हमने।
तो बेमोल नगमे
ना गायेंगे हम ॥4॥










