चंचल मन नित ओ३म् जपा कर
चंचल मन नित ओ३म् जपा कर
ओ३म् जपा कर ओ३म्
पल-पल छिन-छिन
घडी-घडी निशदिन
ओ३म् जपा कर ओ३म्
प्रातः समय की शुभ वेला में
सन्ध्या की पुलकित वेला में
रोम रोम से तेरे निकले
ओ३म् जपा कर ओ३म्
सागर गहरा – टूटी नैया
जीवन तरनी – ओ३म् खिवैया
पार करेंगे भव से तरेंगे
ओ३म् जपा कर ओ३म्
सार तत्त्व की खोज किये जा
नाम सरस रस रोज पिए जा
ताप हरेंगे – कष्ट हरेंगे
ओ३म् जपा कर ओ३म्
चंचल मन नित ओ३म् जपा कर
ओ३म् जपा कर ओ३म्










