अनुपम सौन्दर्य भरी उषा

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अनुपम सौन्दर्य भरी उषा

अनुपम सौन्दर्य भरी उषा
तुम गगन में अद्भुत बन चमको
रात्रि के इस तम-स्तोमरूप
जो अमित्र बना उसे दूर करो
अनुपम सौन्दर्य भरी उषा

सौन्दर्य प्रकृति का है तुममें
मैत्री के गुण भी हैं अपार
तेरे ही कारण चमक रहा
संसिक्त प्रेम से भरा सन्सार
हर किरण विभूषित अतिसुन्दर
सौन्दर्य हमें भी प्रदान करो
अनुपम सौन्दर्य भरी उषा

ना भाव अराति हों हावी
निर्द्वेष बनाकर करो उन्नत
सुन्दर नारी समृद्ध उषे!
बन जाओ हमारी भी हितप्रद
यदि भाव अराति के जाग उठें
किरणों से चूरा-चूर करो
अनुपम सौन्दर्य भरी उषा

हे उषे! आध्यात्मिक प्रज्ञे!
निर्द्वेष बनाकर करो निर्भय
यह ऊर्ध्वयात्रा करो सुगम-उपम
तेरा प्रेम मिले हमें हर समय
अध्यात्म साधना से मन के
पञ्च शत्रु की दृष्टि दूर करो
अनुपम सौन्दर्य भरी उषा
तुम गगन में अद्भुत बन चमको
रात्रि के इस तम-स्तोमरूप
जो अमित्र बना उसे दूर करो
अनुपम सौन्दर्य भरी उषा