पाकर सच्ची राह मैं तुमसे जाग गया हूँ
पाकर सच्ची राह मैं तुमसे
जाग गया हूँ
गातुवित्तम तू है प्रज्ञानी विश्वगुरु
सर्वश्रेष्ठ मार्ग का तू है पथिप्रज्ञ
और मार्गदर्शक पृथु-सभ्य
जैसे माता-पिता मित्र और गुरु
पाकर सच्ची राह मैं तुमसे
जाग गया हूँ
आज हमारा सौभाग्य जगा
सन्मार्ग प्रदर्शक सुखद मिला
अहंभाव तज कृत
क्रियमाण क्रतु
प्रादुर्भूत है तुमसे प्रभु
प्रभु-पथ का अनुसरण
हम सब करेंगे
बन जाएँगे आर्य सतद्भू
ओ…..ऽऽऽऽऽऽऽ
पाकर सच्ची राह मैं तुमसे
जाग गया हूँ
जब अग्निमय तेजस्वी प्रभु
सम्यक रूप से होते प्रादुर्भूत
ऋत की ही राह ले जाते सतत्
ऊर्धवगति में बनते सहायक
परम प्रभु की शरण में तू आजा
वह है महत् यज्ञबन्धु
ओ…..ऽऽऽऽऽऽऽ
पाकर सच्ची राह मैं तुमसे
जाग गया हूँ
अग्नि प्रभु के ही सानिध्य में
वाणियाँ अमृतमय जा पहुँचें
प्रभु में रम के रिझा रहीं ये
और बलद से बल पा रही हैं
वाणियाँ भीनी यह भक्ति के रस की
तव दर्शन पाती है प्रभुजी
ओ…..ऽऽऽऽऽऽऽ
पाकर सच्ची राह मैं तुमसे
जाग गया हूँ
गातुवित्तम तू है प्रज्ञानी विश्वगुरु
सर्वश्रेष्ठ मार्ग का तू है पथिप्रज्ञ
और मार्गदर्शक पृथु-सभ्य
जैसे माता-पिता मित्र और गुरु
पाकर सच्ची राह मैं तुमसे
जाग गया हूँ










