ऐ मेरे मनमोहक मनवा !

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ऐ मेरे मनमोहक मनवा !

ऐ मेरे मनमोहक मनवा!
तुच्छ कामनाएँ तेरी
कर रहा सञ्चित किसके लिए ?
एक कामना के पीछे
कई कामनाएँ खड़ीं
पूरी करेगा किसके लिए?

प्रभु बिना कैसे क्या पाता ?
शेखचिल्ली! बन जाते सपन
उन सपनों की निष्फलता में
दु:खता रहता व्याकुल मन
लोभ-मोह मैं भय-भ्रम पाकर
सञ्चित करता धन
ऐ मेरे मनमोहक मनवा!
तुच्छ कामनाएँ तेरी
कर रहा सञ्चित किसके लिए ?

इस अपार तृष्णा के वश में
पूरा कर देता जीवन
सङ्ग ना जाता कुछ भी और
जाता तो सत्कर्मों का धन
ना माया ना राम रहेगा
हाय रहेगा रुदन
ऐ मेरे मनमोहक मनवा!
तुच्छ कामनाएँ तेरी
कर रहा सञ्चित किसके लिए ?

दिव्य ज्ञानमय बृहद् आकाश में
ज्ञान कर्म के मधुमय मेघ
एक बून्द उस मेघामृत की
बन जाएगी साध्य-सुमेध
तुम्हीं कृपालु बनके बताते
छुपा हुआ भरु-भेद
ऐ मेरे मनमोहक मनवा!
तुच्छ कामनाएँ तेरी
कर रहा सञ्चित किसके लिए ?

एक बून्द गिरी अन्तरिक्ष से
मुझ पर प्यारे हे इन्द्रेश !
इन्द्रवीर्य पोषक रस पाया
दर्शन याज्ञिक हुए अनेक
आत्मत्याग के कर्म हैं
जिनमें तेरी देख-रेख
ऐ मेरे मनमोहक मनवा!
तुच्छ कामनाएँ तेरी
कर रहा सञ्चित किसके लिए ?

पुण्य बन गया मेरा साथी
देने लगा अद्भुत आनन्द
चिरसुख पाया तुच्छ मानव ने
भाग्य प्रभु क्या मेरा कम?
एक बून्द अमृत का आश्रय
अद्भुत रहा प्रबन्ध
ऐ मेरे मनमोहक मनवा!
तुच्छ कामनाएँ तेरी
कर रहा सञ्चित किसके लिए ?
एक कामना के पीछे
कई कामनाएँ खड़ीं
पूरी करेगा किसके लिए?
ऐ मेरे मनमोहक मनवा!
तुच्छ कामनाएँ तेरी
कर रहा सञ्चित किसके लिए ?