उड़ रहा है उड़ रहा है

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उड़ रहा है, उड़ रहा है

उड़ रहा है
उड़ रहा है
हँस मेरा – उड़ रहा है

युग-युगों से
पंख खोले,
खोजता अपना बसेरा
उड़ रहा है
उड़ रहा है
हँस मेरा – उड़ रहा है

देवताओं का ह्रदय में
धारकर वरदान भी
विश्व के सब ज्ञानियों से
सीखकर विज्ञान भी
उड़ रहा बेचैन होकर
तीन लोकों का चितेरा
हँस मेरा
उड़ रहा है
उड़ रहा है
हँस मेरा – उड़ रहा है

उड़ रहा है
और उड़ता जा रहा
अविराम है
देखता लीला जगत् की
भोग से उपराम है
जा रहा है पिय-मिलन को
नील नभ में वह अकेला
हँस मेरा
उड़ रहा है
उड़ रहा है
हँस मेरा – उड़ रहा है