तुम राम को पूजते हो
तुम राम को पूजते हो,
पर बाण चलाना भूल गये।
तुम कृष्ण को पूजते हो,
पर युद्ध में लड़ाना भूल गये।
तुम विश्वकर्मा को पूजते हो,
पर हथियार बनाना भूल गये।
तुम शिव को पूजते हो,
पर नाग लड़ाना भूल गये।
तुम परशुराम को पूजते हैं,
पर परसा उठाना भूल गये।
तूम दुर्गा को पूजते हो,
पर कटार चलाना भूल गये।
तुम काली को पूजते हो,
पर भाला उठाना भूल गये।
तुम हनुमान को पूजते हो,
पर गदा उठाना भूल गये।
तुम गुरुओं को पूजते हो,
पर तलवार घुमाना भूल गये।
तुम यज्ञ को पूजते हो,
पर यज्ञ कर्म को भूल गये।
तुम ब्रम्हचर्य को पूजते हो,
पर लट्ठ तेल लगाना भूल गये।
तुम लंगर को पूजते हो,
खेत शैतान लगाना भूल गये।
तुम शक्ति को पूजते हो,
पर केवल भक्ति में ही डूब गये।
तुम गंगा को पूजते हो,
दुष्टों को मोक्ष दिलाना भूल गये।
अब जाग सनातनी जाग जाग,
कहीं अपना नामों निशान ना भूल जाओ।
तज जात-पात के शंख ढोल,
खोलो शैतानों की पोल।
आत्मरक्षा के लिये ओ सुन,
बजा दो अब तुम युद्ध की धुन।
बहुत सो लिये तुम अब तो जाग,
जला लें अब अपने सीने में आग।
तुम एक ही जाति आर्य हो,
तुम ही सनातन के पहरेदार हो।
महापुरुष थे हमारे जिस राह चले,
वैसे सैनिक बन शैतानों पर कहर बनें।।










