हे प्रभु !! दे दो प्रेरणा पाप पृथक हो जाएँ

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हे प्रभु !! दे दो प्रेरणा पाप पृथक हो जाएँ

हे प्रभु !! दे दो प्रेरणा
पाप पृथक हो जाएँ
हितकारी उत्तम कर्मों में
जीवन सफल बनाएँ

सच्चे मित्र सखा प्रभु तुम हो
हर पल हमको देते हो स्नेह
अति प्रिय स्वार्थ रहित हो प्रभुवर
रूप तुम्हारा निर्लेप-विदेह
प्राण समान तुझे हम चाहें
हर पल तू साथ निभाए
हे प्रभु !! दे दो प्रेरणा
पाप पृथक हो जाएँ

जैसे लम्बी यात्रा को जाएँ
रेल या वायुयान में जाएँ
वैसे जन्म से मृत्यु की यात्रा
देहरूप रथ सफर कराए
लोक-परलोक की यात्रा हेतु
आश्रय तेरा ही पाएँ
हे प्रभु !! दे दो प्रेरणा
पाप पृथक हो जाएँ

देहरूप रथ प्राणरूप मित्र
तुझसे बढ़कर कौन है प्यारा?
आदरणीय अतिथि सम पूज्य
हम करें स्वागत हृदय के द्वारा
कौन सा आसन भेंट करें प्रभु?
स्वागत शब्द क्या लाएँ ?
हे प्रभु !! दे दो प्रेरणा
पाप पृथक हो जाएँ

किन शब्दों से करें गुणगान?
क्या क्या अर्पण हम कर डालें?
हर वस्तु हर ज्ञान के हो स्वामी
हैं अल्पज्ञ तो स्तुति गुण गा लें
आत्मसमर्पण के अधिकार से
क्यों ना निहाल हो जाएँ?
हे प्रभु !! दे दो प्रेरणा
पाप पृथक हो जाएँ
हितकारी उत्तम कर्मों में
जीवन सफल बनाएँ