आग जलाई हमने परोपकार के लिए
आग जलाई हमने
परोपकार के लिए
यज्ञ की भावनाएँ
चलीं शुद्ध व्यवहार लिए
आग जलाई हमने
पहले तो आसमां-ज़मी को
मैं बना लूँ अपना
अपना बनाकर विश्व को
करूँ सार्थक मैं सपना
फिर घर में अपना फूँक दूँ
तमाशा किए हुए
यज्ञ की भावनाएँ
चलीं शुद्ध व्यवहार लिए
आग जलाई हमने
हे अग्निदेव! यह झाँकियाँ
क्या दिल में समा सकें?
अङ्ग अङ्ग में यह छा रहीं
ईंधन लिए हुए
उछलेगी भड़केगी अगन
ज्वाला लिए हुए
यज्ञ की भावनाएँ
चलीं शुद्ध व्यवहार लिए
आग जलाई हमने
दो समिधाएँ
आसमाँ-ज़मी मुझे पसन्द
विश्व की छोटी वस्तुएँ
अब देती नहीं आनन्द
अब विश्व प्यारा लगता है
अणु-अणु का प्रेम लिए
यज्ञ की भावनाएँ
चलीं शुद्ध व्यवहार लिए
आग जलाई हमने
लोक-परलोक का किया है
आज मैंने यज्ञ
और अग्नि देव बने हुए
यज्ञ के पथिप्रज्ञ
आत्मा ने दान-प्रेम,
खज़ाने लुटा दिए
यज्ञ की भावनाएँ
चलीं शुद्ध व्यवहार लिए
आग जलाई हमने
द्युलोक मेरी आत्मा है
और देह है पृथ्वी
कर दिए दोनों स्वाहा
मिल गई परमात्मग्नि
रमणीय दान-लीला ने
प्रभु से आनन्द लिए
यज्ञ की भावनाएँ
चलीं शुद्ध व्यवहार लिए
आग जलाई हमने
परोपकार के लिए
यज्ञ की भावनाएँ
चलीं शुद्ध व्यवहार लिए
आग जलाई हमने










