दया दृष्टि मेरी ओर, कर प्रभु चित्तचोर
दया दृष्टि मेरी ओर
कर प्रभु चित्तचोर
दूर जाना ना
दूर जाना ना
दूर जाना ना
ना ही कोई दूजा ठोर
जिसपे करूँ मैं गौर
दूर जाना ना
दूर जाना ना
दूर जाना ना
भावना हृदय की भाषा
सिर्फ प्रभु तू ही जाने
पाप दुर्गुणों के कर्म
कर रहा हूँ मनमाने
मार्ग सूझा ना
तुझमें डूबा ना
मार्ग सूझा ना,
तुझ में डूबा ना
दया दृष्टि मेरी ओर
कर प्रभु चित्तचोर
दूर जाना ना
दूर जाना ना
दूर जाना ना
मन की किवड़िया दी है
प्रभु तेरे लिए खोल
प्रीत से दे दो ना दर्शन
मीत मेरे अनमोल
भूल जाना ना
भूल जाना ना
भूल जाना ना
भूल जाना ना
दया दृष्टि मेरी ओर
कर प्रभु चित्तचोर
दूर जाना ना
दूर जाना ना
दूर जाना ना
हृदय रहा मेरा बोल
तरंगों में आकर डोल
आत्म-चित्त-मन-वाणी में
रस ओ३मामृत घोल
मन कर सुना ना
मन कर सुना ना
मन कर सुना ना
मन कर सुना ना
दया दृष्टि मेरी ओर
कर प्रभु चित्तचोर
दूर जाना ना
दूर जाना ना
दूर जाना ना
जगत् में जो भी देखा
सब तेरा दयानिधे
एक आत्मा ही है जो
करूँ अर्पण तुझे
दरस दीवाना
दरस दीवाना
दरस दीवाना
दरस दीवाना
दया दृष्टि मेरी ओर
कर प्रभु चित्तचोर
दूर जाना ना
दूर जाना ना
दूर जाना ना
ना ही कोई दूजा ठोर
जिसपे करूँ मैं गौर
दूर जाना ना
दूर जाना ना
दूर जाना ना










