आओ प्रभु से पा लें, हम सात्विक उभय निधि
आओ प्रभु से पा लें
हम सात्विक उभय निधि
हमें वैश्वानर बना देवें
भौतिक अध्यात्मिक धनी
आओ प्रभु से पा लें
हे मन्द्र! आनन्ददाता
दे दो फुहार आनन्द की
बनें दिव्य गुणों से सत्य
शिव सुन्दर हम सुधी
आओ प्रभु से पा लें
बिन लक्ष्य ना तो चाहें
धन-वस्त्र सोना-चाँदी
ना महल ना हीरे-मोती
क्या मिलेगा पाके इनको
जो हटेगी सुख व शान्ति
आओ प्रभु से पा लें
हम सात्विक उभय निधि
हमें वैश्वानर बना देवें
भौतिक अध्यात्मिक धनी
आओ प्रभु से पा लें
धन से विहीन निर्धन
भी पा सकता है विभाती
पाना जो चाहे कान्ति
जिनमें संयम सन्तोष है
होती है सुख की प्राप्ति
आओ प्रभु से पा लें
हम सात्विक उभय निधि
हमें वैश्वानर बना देवें
भौतिक अध्यात्मिक धनी
आओ प्रभु से पा लें
जिन्हें तीन ऐषणाएँ
जीवन में ना सतातीं
पापों में ना ले जातीं
उन्हें लोकहित की ऐषणा
लग जाती है सर्वोपरि
आओ प्रभु से पा लें
हम सात्विक उभय निधि
हमें वैश्वानर बना देवें
भौतिक अध्यात्मिक धनी
आओ प्रभु से पा लें
ऐसे यह सन्यासीजन
बन जाते हैं याज्ञिक अग्नि
सद्गुणों की होती वृद्धि
ज्ञान कर्म से प्रकाशित जन
पाते हैं ईश की शरणी
आओ प्रभु से पा लें
हम सात्विक उभय निधि
हमें वैश्वानर बना देवें
भौतिक अध्यात्मिक धनी
हे मन्द्र! आनन्ददाता
दे दो फुहार आनन्द की
बनें दिव्य गुणों से सत्य
शिव सुन्दर हम सुधी
आओ प्रभु से पा लें










