परमव्योम ईश्वर को ध्यायें,आत्मसात हो वेद ऋचाएँ

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परमव्योम ईश्वर को ध्यायें, आत्मसात हो वेद ऋचाएँ

परमव्योम ईश्वर को ध्यायें,
आत्मसात हो वेद ऋचाएँ
बिन समझे, ना पढें पढ़ाएँ
अक्षर तत्व को समझ समझाएँ
परमव्योम ईश्वर को ध्यायें

प्रथित आकाश से भी उत्कृष्ट है
सकल ब्रह्माण्ड में प्रभु विसृत है
परमव्योम को ‘ओम्’ पुकारें
अविनाशी रक्षक जो कहाये
परमव्योम ईश्वर को ध्यायें

जगत् का मर्म वेद समझाए
देव-स्तुति मन्त्रों में पाएँ
इन सब देवों का अधिदेव है
सब उसमें उसे सबमें पाएँ
परमव्योम ईश्वर को ध्यायें

नहीं अनेक, वो एक ही ईश्वर
ज्ञान पूर्ण है वेद के भीतर
ईश प्राप्ति का वेद ही साधन
समासीन ही ज्ञान को पाए
परमव्योम ईश्वर को ध्यायें

वेद मन्त्र प्रभु के प्रतिबिम्ब हैं
परम व्योम जो ज्ञानवृन्द है
पढें ऋचाएँ पवित भाव से
ईश-प्रेम संगीत सुनाएँ
परमव्योम ईश्वर को ध्यायें

संशय रहित है वेद अनुगामी
परिपक्व होते हैं सुजानी
अक्षर प्रभु में समाधिस्त होकर
आत्मानन्द शान्ति को पाएँ
परमव्योम ईश्वर को ध्यायें,
आत्मसात हो वेद ऋचाएँ
बिन समझे, ना पढें पढ़ाएँ
अक्षर तत्व को समझ समझाएँ
परमव्योम ईश्वर को ध्यायें