यूँ प्यारा लागै जी है सच्चा ओ३म् नाम…

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यूँ प्यारा लागै जी है सच्चा ओ३म् नाम…

यूँ प्यारा लागै जी है सच्चा ओ३म् नाम…

रचा ये संसार, पावे ना जिसका पार-२,
सूरज चन्द्र तारे तमाम, यूँ प्यारा लागे..

२ जोड़कर पाँच तत बनाया जगत्-२,
पशु पक्षी ताम-ताम-यूँ प्यारा लागे..

३. बनाये कैसे नेम, उके ना कोई टेम-२,
क्या अच्छा इन्तजाम यूँ प्यारा लागे..

४ पशु क्या इंसान, है न्यारी पहचान-२ हैं
अलग सबके चाम-यूँ प्यारा लागे..

५. सर्दी व बरसात रचे, दिन रात-२
कभी सुबह कभी शाम यूँ प्यारा लागे…

६. फूलों के कितने रंग होते, ना कभी भंग-२
सहें सर्दी वर्षा घाम – यूँ प्यारा लागे..

मनुष्य चोला, क्या अनमोला-२
जो है मुक्ति का धाम-यूँ प्यारा लागे..

८. नित्यानन्द तेरा नाम, जपै हैं सुबह शाम-२
जिसका है कलोई गाम-यूँ प्यारा लागे…