ये सूरज चाँद सितारे,बादल में घटायें काली।
तर्ज – ये चाँद सा रोशन चेहरा……
1 ये सूरज चाँद सितारे,
बादल में घटायें काली।
आकाश बनाया नीला,
सूरज में भर दी लाली।
तारीफ करूँ क्या उसकी,
जिसने जगत रचाया-(2)
2 ये दुनियाँ रूपी गुलशन,
वो ईश्वर इसका माली
कण-कण मे वो ही रमा है,
महिमा उसकी है निराली
आकार कोई ना उसका,
क्या अजब निराली माया
जग ढूंढ-ढूंढ़ हारे,
ना पार किसी को पाया
तारीफ करूँ क्या……
3 सन्तान प्रभु की हैं हम,
वो दाता पिता हमारा
संसार का है वो वाली,
सबको उसका ही सहारा
दिन रात देखते हैं हम,
प्रभु के अजब नज़ारे
जितने भी जीव हैं जग में,
सब हैं उसके ही सहारे
तारीफ करूँ क्या……
हम ढूंढ़ रहे भगवन को,
भगवन है पास हमारे
मन के मंदिर में रहता,
ना इतना “सचिन” विचारे
ओ३म् जाप को जग में,
सन्तों ने मधुर बताया
जिसने भी इसको ध्याया,
मन में ही दर्शन पाया
तारीफ करूँ क्या……










