ये संसार सारा प्रभु ने रचाया।
तर्ज – ये दिल और उसकी निगाहों……
ये संसार सारा, प्रभु ने रचाया।
सारे जहाँ में है वो ही समाया ।।
साथी सभी का वही मीत प्यारा
वो दाता दयालु सहारा हमारा
‘सचिन’ आज तूने उसे ही भुलाया
सारे जहाँ में है वो ही समाया
सरोवर कहीं पे कहीं पे हैं
झीलें काली घटा है कहीं
मेघ नीले मेहरो-माह से
गगन को सजाया सारे जहाँ में है
वो ही समाया
समन्दर में हंसों को मोती खिलाये
भोजन सभी को प्रभु पहुँचाये
सुन्दर ये सृष्टि उसी की है
माया सारे जहाँ में है वो ही समाया
भूखे को भोजन प्यासे को
पानी उसी ने तो दी है मधुर
हमको वाणी जगत में उसी
को महान बताया सारे जहाँ में है
वो ही समाया










