ये पापों का जीवन है और मैं हूँ
अथाह सागर भँवर है और मैं हूँ ॥
तेरे पुरुषार्थ से सृष्टि में जीवन, यहाँ आलस्य मेरा और मैं हूँ,
ये पापों का…
तू आनन्द में प्रभु रहता सदा ही, यहाँ बेचैनियाँ हैं और मैं हूँ,
ये पापों का…
तुम्हारे कर्म हैं निष्काम प्रभुजी, यहाँ स्वार्थ खड़ा है और मैं हूँ
ये पापों का…
तेरे भण्डार ना खाली कभी भी, यहाँ कंगाल हालत और मैं हूँ
ये पापों का…
दया है प्रेम उपकार तुझमें, यहाँ पापों का जीवन और मैं हूँ
ये पापों का…
तू है निर्लेप, और निर्दोष दामन, यहाँ भय शर्म शंका और मैं हूँ
ये पापों का…
महासागर तू वेदों का है दाता, यहाँ अज्ञानता है और मैं हूँ
ये पापों का…
तुम्हारे रूप में ब्रह्माण्ड सारा, यहाँ छोटा सा बिन्दु और मैं हूँ
ये पापों का…
कृपाओं से भरा ये त्रिलोक तेरा, यहाँ बस प्रार्थना है और मैं हूँ,
ये पापों का…
विनय करता ‘ललित’ ले चल वहाँ पर, जहाँ तेरी शरण है और मैं हूँ
ये पापों का…
तर्ज: सलोना सा सजन है










