ये दुनिया मुसाफिर खाना
ये दुनिया मुसाफिर खाना
तुझे यहाँ से पड़ेगा जाना
क्या करता है, मेरा मेरा
ना कुछ तेरा, ना कुछ मेरा
सब कुछ तो यहीं रह जाना
तुझे यहाँ से पड़ेगा जाना
भाई-बन्धु कुटुम्ब-कबीला
ये सब है दो दिन का मेला
कोई साथ नहीं तेरे जाना
तुझे यहाँ से पड़ेगा जाना
मन में “सरोज” प्रभु को बसा ले
प्रभु भक्ति की ज्योति जगा ले
तू बना ले वहीं पे ठिकाना
तुझे यहाँ से पड़ेगा जाना
ये दुनिया मुसाफिर खाना
तुझे यहाँ से पड़ेगा जाना










