यक्षराज और धर्मराज में होने लगे उत्तर व प्रश्न।

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यक्षराज और धर्मराज में होने लगे उत्तर व प्रश्न।

यक्षराज और धर्मराज में
होने लगे उत्तर व प्रश्न।
यक्ष के प्रश्नों का उत्तर
श्री धर्मराज दें होके मग्न ।।

यक्ष ने कहा सूर्य नित्य किसकी
प्रेरणा से निकलता है?
उत्तर मिला ब्रह्म की शक्ति
से सब चक्कर चलता है।

यक्ष ने कहा मनुष्य जीवन में
किसकी सदा सबलता है?
उत्तर मिला धैर्य धैर्य से ही
मनुष्य सम्भलता है।
प्रश्न हवा से तेज चले कौन
झट से उत्तर मिला कि मन ।।1।

यक्ष ने कहा कौन शास्त्र
पढ़कर नर बुद्धिमान बने?
उत्तर मिला महान लोगों की
संगीत कर नर महानबने।।

पृथ्वी से भारी चीज है क्या?
मां जिससे सन्तान बने।

सबसे ऊंचा कौन?
पिता सबसे ऊंचा स्थान बने।।

सबसे बड़ा कौन बर्तन ?
उत्तर मिला कि भूमि बर्तन ।।2।।

यक्ष ने कहा तृण से तुच्छ
क्या वस्तु कही जाती है?
उत्तर मिला तृणा से तुच्छ
भिक्षा वृत्ति कहलाती है।।
घर ही में रहने वाले का

सबसे बड़ा कौन साथी है?
गृहस्थ में सब से बड़ा साथी
दुनियाँ में पत्नि पाती है।

प्रश्न विदेश में साथी कौन?
उत्तर मिला साथी विद्याधन ।।३।।

मरणासन का मित्र कौन?
कहा दान जीव के साथ चले।

सुख क्या हैं?
सुख वह वस्तु जो
सच्चरित्रता पर फूलेफले ।।
किसके छूट जाने से मनुष्य
सर्व प्रियबन कर लगे गले।
अहम भाव से उत्पन्न गर्व
छूटे जाने पर मनुष्य भले ।।

उत्तम मनुष्य किसे कहते हैं?
जिसका उत्तम चाल चलन ।।4।।

यक्ष ने कहा ब्राहृमणत्व जन्म
पर या विद्या पर हैं निर्भर ?
उत्तर मिला जन्म से नहीं
ब्राह्मण बने विद्याको पाकर ।।

किस वस्तु के खो जाने पर
दुःख नहीं हो दो उत्तर?
उत्तर मिला दुख नहीं होता
कभी कोध खोजाने पर।।

किसे गवांकर धनी बने?
लालच खो कर के हो सम्पन्न।।5।।

सबसे ज्यादा आश्चर्य की
चीज है क्या बतलाओं झट?
तब भी मौत याद नहीं आती
अनगिन साथी गये मरघट।
यक्ष ने जितने प्रश्न किये दिये
उत्तर उचित धर्म ने झट।
अन्त में थककर यक्षराज गया
धर्म से प्रश्न करने से नट ।।
शोभार.म मधिष्ठर का
विद्वत् मण्डल करे अनुमोदन।