सब से बड़ा रुपैया
(तर्ज- मेरा यार बना है दूल्हा और फूल खिले हैं दिल के)
यहाँ बाबा बड़ा न भैय्या सबसे है बड़ा रुपैया।
इसी के सारे रिश्ते नाते सब का यही रवैया।
यहाँ बाबा बड़ा न भैय्य……….
१. गोल रुपैया चाँदी का हो या कागज़ का नोट।
छोटा सा है फिर भी इसकी बहुत बड़ी है ओट।
इस के आगे थम जाती है वेगवती पुरवैया ।
यहाँ बाबा बड़ा न भैय्या……..
२. किसी तरह से मिले रुपैया यत्न करें दिन रैन ।
पल दो पल के लिए भी मिलता नहीं किसी को चैन ।
धन की वर्षा से भी मन की भरती नहीं तलैया।
यहाँ बाबा बड़ा न भैय्या……….
३. पास रुपैया हो तो सब के सब करते हैं प्यार।
लेकिन ख़ाली जेब देख कर देते हैं दुत्कार।
आज ढूँढता फिरे सुदामा मिलता नहीं कन्हैया।
यहाँ बाबा बड़ा न भैय्या……….
४. ‘पथिक’ रुपैये के चक्कर में चला आज का दौर।
कहीं देख लो बना आदमी कठपुतली के तौर।
नाच रहा है बिना ताल के ता थैय्या ता थैय्या।
यहाँ बाबा बड़ा न भैय्या………
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