यह शमां निकल न जाये

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यह शमां निकल न जाये

यह शमां निकल न जाये
यूं ही हाथ मलते मलते।
आया है अब बुढ़ापा तेरी
उमर ढलते ढलते ।

बीता है तेरा बचपन,
जवानी ने साथ छोड़ा।
अब तो बना है धागा,
परिवार बढ़ते बढ़ते ।।
यह…………..

औरों का देख वैभव,
तुझे नींद नहीं आती।
जीवन बिता रहा है,
दिन रात जलते जलते ।।
यह………….

इस जिन्दगी में लाखों,
किये पाप तूने पगले।
बरसों गुजर गये हैं,
दुनियां को छलते-छलते ।।
यह………….

कर याद ईश्वर को,
कहीं बैठकर बैरागी।
रूक जाये न कहीं पै,
तेरी सांस चलते चलते ।।
यह…………

प्रभु नाम को अंक है
और साधन है शून।
अंक गये कुछ हाथ नहीं,
अंक रहे दश गुन।।