यह मत कहो कि जग में कर सकता क्या अकेला ।
यह मत कहो कि जग में कर सकता क्या अकेला ।
लाखों में काम करता इक शूरमा अकेला ॥
1.आकाश में करोड़ों तारे हैं टिमटिमाते ।
अन्धकार नष्ट करता है चन्द्रमा अकेला ॥
2.जंगल में जन्तुओं पर बिठला के धाक अपनी ।
आजाद शेर वन में है घूमता अकेला ॥
3.एक रोज शाहजहां के दरबार में अमरसिंह ।
बल अपनी भुजाओं का दिखला गया अकेला ॥
4.असुरों का मद मिटा के लंकापुरी जला के ।
हनुमान् रामदल में फिर आ गया अकेला ॥
5.था सब जगत् विरोधी जिस पर ऋषि दयानन्द ।
वैदिक धर्म का झण्डा , फहरा गया अकेला ॥
6.जापान में सजा के आजाद हिन्द सेना ।
जौहर सुभाष नेता दिखला गया अकेला ॥










