यह जीवन अनमोल रे
यह जीवन अनमोल रे,
तोहे फिर न मिलेगा।
माटी में न रोल रे,
तोहे फिर न मिलेगा।।
बचपन बीता आए जवानी,
आया बुढ़ापा खतम कहानी।
अब तो आंखे खोल रे,
तोहे फिर……
तन-मन-धन सब माल बेगाना,
जिसकी खातिर हो दीवाना।
रहा है इत उत डोल रे,
तोहे फिर……..
संगी साथी प्यारे प्यारे,
छोड़ जाएंगें इक दिन सारे।
राम नाम सत बोल रे,
तोहे फिर………
वीर जो करना है सो करले,
खाली झोली प्यार से भरले।
न कर टाल मटोल रे,
तोहे फिर……..
जिस तरह अग्नि का
शोला संग में मौजूद है।
इस तरह परमात्मा
हर रंग में मौजूद है।










