यह जग रैन बसेरा प्रभु के दर आ बन्देया ।

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प्रभु के दर आ बन्देया

(तर्ज – नटवर नागर नंदा भजो रे मन गोबिन्दा)

यह जग रैन बसेरा प्रभु के दर आ बन्देया ।
जन्म सफल हो तेरा प्रभु के दर आ बन्देया ।

१. ज्ञान का सूरज उगने लगा है।
नींद से हर प्रभु भक्त जगा है।
है सब ओर सवेरा प्रभु के दर आ बन्देया।

२. अन्दर के पट खोल दे प्यारे।
चमक उठें सब महल मुनारे।
हो जाये दूर अन्धेरा प्रभु के दर आ बन्देया।

३. प्रभु दर्शन की आस लगा ले।
ईश्वर के संग प्रीत बढ़ा ले।
कर ले प्यार घनेरा प्रभु के दर आ बन्देया।

४. लालच लोभ ने जाल बिछाया।
मोह माया ने आन फँसाया।
काम क्रोध ने घेरा प्रभु के दर आ बन्देया।

५. हर अपना विपरीत हुआ है।
यह जग किस का मीत हुआ है।
क्या तेरा क्या मेरा प्रभु के दर आ बन्देया।

६. सब आ जा ख़ुशियाँ हैं तेरे घर में।
अपने मन मन्दिर में। ‘पथिक’ लगा ले
डेरा प्रभु के दर आ बन्देया।