यह भी नहीं सोचा तूने कभी

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यह भी नहीं सोचा तूने कभी

यह भी नहीं सोचा तूने कभी
तेरे देश की हालत क्या होगी
ऐ जवां नौ जवां बता इससे बढ़कर
कोई और जलालत क्या होगी।।


हंसते हुए वीर अनेकों
मरे जिसके लिए तेरे
आदर्श समय की हवा ने
बिस्मार किये तेरे
एक रोज ये दुनिया वाले
कदमों पै नीये तेरे
अब उनकी दया के
ऊपर परिवार जियें तेरे
दाता से बन गया भिक्षुक
अब और हिमाकत क्या होगी।।1।।

जननी धरनी गो माता
है तीनों दुखी तेरी
तब ही तो आज
गिरावट है चहुमुखी तेरी
जालिम जुल्मों के सन्मुख
गर्दन न झुकी तेरी


सब आन बान मर्यादा
अब खत्म हो चुकी तेरी
अपना ही सब कुछ लुटा दिया,
औरों की हिफाजत क्या होगी।।2।।

सारा संसार तुझे अब
कुछ भी नहीं मान रहा
फिर भी नहीं किंचित तुझको
कुछ अपना ध्यान रहा
उत्तरी सीमा पर तेरी
चीन दे ऐलान रहा


पश्चिमी सरहद पर
मोरचा ला पाकिस्तान रहा
कश्मीर की घटना से बढ़कर
अब और शरारत क्या होगी।।3।।

एक रोज विश्व ने तेरी
आवाज की कीमत की
जो कह दिया हो गया वो
ही इतनी बड़ी इज्जत की
धिक्कार आज यह जीना
जिन्दगी है जिल्लत की


हो गई गिरावट की हद
प्रेमी ने शिकायत की
अब भी नहीं संभले
आप अगर कोई और
जलालत क्या होगी।।4।।